Home पॉलिटिक्स अडानी के 30 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर CM विजय की ‘नो एंट्री’, स्मार्ट मीटर को लेकर बहस, क्या जनता को बचाया भारी बिजली बिल से?
पॉलिटिक्स

अडानी के 30 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर CM विजय की ‘नो एंट्री’, स्मार्ट मीटर को लेकर बहस, क्या जनता को बचाया भारी बिजली बिल से?

Share
Split image of two men in suits; red Hindi caption at the bottom reads 'विजय ने वो कर दिखाया जो कोई CM आज तक नहीं कर सका' and a news logo in the corner.
Share

The Journalist News Lucknow: तमिलनाडु में स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों में कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री थलपति विजय ने अडानी समूह से जुड़े कथित ₹20,000 करोड़ से ₹30,000 करोड़ के स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस दावे के बाद राज्य की ऊर्जा नीति, बिजली बिल और स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, इन दावों को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।

स्मार्ट मीटर को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

स्मार्ट मीटर को बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। सरकारों का तर्क है कि इससे बिजली खपत की सटीक निगरानी, बिलिंग में पारदर्शिता और लाइन लॉस कम करने में मदद मिलती है। दूसरी ओर, कई राज्यों में उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर को लेकर शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में अचानक वृद्धि देखने को मिली है। हालांकि बिजली विभागों का कहना है कि नई तकनीक वास्तविक खपत को अधिक सटीक तरीके से दर्ज करती है, जिसके कारण कई उपभोक्ताओं को पहले और अब के बिल में अंतर महसूस हो सकता है।

Single‑phase two‑wire AC smart electricity meter with digital readout and a transparent bottom cover, measuring household usage.

सोशल मीडिया पर क्या किया जा रहा दावा?

वायरल पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि तमिलनाडु सरकार ने कथित तौर पर इस परियोजना को इसलिए मंजूरी नहीं दी क्योंकि इससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता था। इन पोस्टों में यह भी कहा जा रहा है कि राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देते हुए परियोजना को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया। हालांकि, ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और आधिकारिक दस्तावेजों या सरकारी बयान के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भी उठ चुके हैं सवाल

स्मार्ट मीटर को लेकर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ उपभोक्ताओं ने अधिक बिल आने और मीटर रीडिंग में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। वहीं बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि अधिकांश मामलों में जांच के बाद तकनीकी कारणों या वास्तविक खपत का पता चलता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था को सफल बनाने के लिए पारदर्शिता, उपभोक्ता जागरूकता और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र बेहद जरूरी है।

राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा स्मार्ट मीटर

स्मार्ट मीटर अब केवल तकनीकी या प्रशासनिक विषय नहीं रह गया है। कई राज्यों में यह राजनीतिक मुद्दे के रूप में भी उभर रहा है। विपक्षी दल जहां इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ बताते हैं, वहीं सरकारें इसे बिजली क्षेत्र में सुधार का अहम हिस्सा मानती हैं। तमिलनाडु में भी यही बहस देखने को मिल रही है। समर्थकों का कहना है कि जनता के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जबकि दूसरी ओर आधुनिक बिजली प्रबंधन के लिए नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।

आगे पढ़िए: वाराणसी में नर्सिंग छात्रा की रहस्यमयी मौत बॉयज हॉस्टल की सीढ़ियों पर मिला शव, मोबाइल गायब

author avatar
Sanskriti Tyagi
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles