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बिजली विभाग में बड़ा घमासान, ऊर्जा मंत्री और UPPCL चेयरमैन आमने सामने, वायरल पत्र से मचा बवाल

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Man in a beige shirt and maroon vest, wearing glasses, sits at a desk with a microphone; a document inset appears on the left.
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The Journalist News Lucknow: उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में इन दिनों अंदरूनी खींचतान और प्रशासनिक मतभेद चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल के बीच कथित मतभेदों को लेकर एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पत्र में ऊर्जा मंत्री ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर नाराजगी जाहिर की है, जिसके बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। चूंकि यह विभाग सीधे करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है।

वायरल पत्र में क्या है?

Official government document with a circular emblem at the top center and Devanagari text, outlining numbered paragraphs and points.
Hindi document announcing UPPCL's 10% Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) starting June 2026, with notes and official signature at bottom.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पत्र के अनुसार, ऊर्जा मंत्री ने UPPCL चेयरमैन को संबोधित करते हुए बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों पर आपत्ति जताई है। पत्र में मंत्री ने कथित तौर पर कहा है कि सरचार्ज बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण फैसले से पहले उनकी सहमति नहीं ली गई। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि इतने अहम निर्णय की पूर्व जानकारी विभागीय मंत्री को क्यों नहीं दी गई। मंत्री ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि जनता से सीधे जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय और पारदर्शिता आवश्यक है ताकि किसी भी फैसले का प्रभाव उपभोक्ताओं पर अनावश्यक रूप से न पड़े।

सरचार्ज बढ़ाने पर जताई नाराजगी

वायरल पत्र का सबसे चर्चित हिस्सा बिजली उपभोक्ताओं पर लगाए जाने वाले सरचार्ज को लेकर है। पत्र में कथित रूप से पूछा गया है कि सरचार्ज बढ़ाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया और विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी पहले क्यों साझा नहीं की गई। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि बिजली दरों, सरचार्ज और उपभोक्ता शुल्क से जुड़े फैसले सीधे आम लोगों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में इन निर्णयों को लेकर विभागीय समन्वय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

समीक्षा बैठक को लेकर भी उठे सवाल

पत्र में केवल वित्तीय या प्रशासनिक निर्णयों का ही जिक्र नहीं है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। वायरल दस्तावेज के अनुसार, ऊर्जा मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ऐसे समय आयोजित हुई जब चेयरमैन मुख्यालय से बाहर थे और बैठक ऑनलाइन माध्यम से करनी पड़ी। मंत्री ने भविष्य के लिए निर्देशात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यालय छोड़ने से पहले संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि विभागीय कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

विभागीय समन्वय पर उठे प्रश्न

ऊर्जा विभाग प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक माना जाता है। बिजली आपूर्ति, बिलिंग, लाइन लॉस, स्मार्ट मीटर और उपभोक्ता शिकायतों जैसे विषय सीधे जनता से जुड़े होते हैं। ऐसे में विभाग के शीर्ष स्तर पर मतभेदों की खबरें सामने आने के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े विभागों में बेहतर समन्वय और संवाद व्यवस्था बेहद जरूरी होती है ताकि नीतिगत फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा

वायरल पत्र सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे विभागीय जवाबदेही का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे प्रशासनिक मतभेद का संकेत मान रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने भी बिजली बिल, सरचार्ज और विभागीय फैसलों को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की हैं। हालांकि विभाग की ओर से पत्र को लेकर आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

आगे पढ़िए: स्कूल में छात्र से मारपीट का वीडियो वायरल, पश्चिम बंगाल में बढ़ा तनाव, जांच की मांग तेज़

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