The Journalist News Lucknow: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर एक महत्वपूर्ण दौर की बातचीत जल्द शुरू होने जा रही है। इस संबंध में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (US Trade Representative) के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 22 जून की शाम नई दिल्ली पहुंचेगा। दोनों देशों के बीच होने वाली यह बैठक व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के साथ साथ कई जटिल मुद्दों के समाधान का रास्ता भी खोल सकती है। जानकारी के अनुसार, 23 और 24 जून को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत के उद्योग मंत्री और वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगा। इस बैठक में व्यापार, निवेश, निर्यात, आयात और टैरिफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर टिकी हैं उम्मीदें

भारत और अमेरिका दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता दोनों देशों के व्यापार को और अधिक आसान तथा लाभदायक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समझौते पर सकारात्मक प्रगति होती है तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। वहीं अमेरिकी कंपनियों को भी भारत में निवेश और व्यापार विस्तार के लिए अधिक अनुकूल वातावरण मिल सकता है।
सेक्शन 301 के तहत प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ बना बड़ा मुद्दा
इस बैठक में सबसे अधिक चर्चा जिस मुद्दे को लेकर होने की संभावना है, वह अमेरिकी प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ है। अमेरिका ने जबरन मजदूरी (Forced Labour) से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए सेक्शन 301 के तहत भारत समेत 53 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव कई देशों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि अतिरिक्त शुल्क लागू होने की स्थिति में निर्यात लागत बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। भारत भी उन देशों में शामिल है जो इस प्रस्ताव के संभावित प्रभावों पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अतिरिक्त टैरिफ लागू होते हैं तो कुछ भारतीय उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली बैठक में इस मुद्दे का समाधान तलाशना दोनों पक्षों की प्राथमिकता हो सकता है।
भारत की क्या हो सकती है रणनीति?
भारत लंबे समय से निष्पक्ष और संतुलित व्यापार व्यवस्था का समर्थक रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय पक्ष बैठक के दौरान यह स्पष्ट करेगा कि किसी भी प्रकार का अतिरिक्त टैरिफ वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है और इससे दोनों देशों के आर्थिक हितों पर असर पड़ सकता है। भारत की कोशिश होगी कि व्यापारिक बाधाओं को कम किया जाए और ऐसे समाधान निकाले जाएं जिससे दोनों देशों के उद्योगों और कारोबारियों को लाभ मिले। साथ ही भारतीय अधिकारी अमेरिका के सामने अपने उद्योगों की चिंताओं को भी मजबूती से रख सकते हैं।
व्यापारिक जगत की नजरें दिल्ली बैठक पर
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर उद्योग जगत और निर्यातकों की नजरें दिल्ली में होने वाली इस बैठक पर टिकी हुई हैं। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि टैरिफ विवाद का समाधान निकलता है तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके अलावा निवेश, तकनीक, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकती है वार्ता
23 और 24 जून को होने वाली बैठक को भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा भविष्य की व्यापारिक नीतियों को प्रभावित कर सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अतिरिक्त टैरिफ के प्रस्ताव को लेकर दोनों पक्ष किस तरह का समाधान निकालते हैं और द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में कितनी प्रगति हो पाती है। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।
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