The Journalist News (Lucknow): दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin की कीमत में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बिटकॉइन अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार 60,000 अमेरिकी डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और निवेशकों की बदली हुई रणनीति के कारण क्रिप्टो बाजार पर दबाव बढ़ा है। वहीं दूसरी ओर, वैश्विक तनाव में कुछ कमी आने के संकेतों के बीच दुनिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला और अधिकांश प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती बनी बड़ी वजह

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स करीब 13 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंचने से निवेशकों का रुझान डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तब बिटकॉइन और अन्य जोखिम वाले निवेश साधनों पर दबाव देखा जाता है। इसी कारण क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिकवाली बढ़ी और बिटकॉइन महत्वपूर्ण समर्थन स्तर से नीचे आ गया।
वैश्विक शेयर बाजारों में लौटी तेजी
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव में कुछ राहत के संकेत मिलने के बाद निवेशकों का भरोसा वैश्विक शेयर बाजारों में लौटता दिखाई दिया। एशिया, यूरोप और अमेरिका के कई प्रमुख बाजारों में बढ़त दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो इक्विटी बाजारों में निवेशकों का विश्वास और मजबूत हो सकता है।
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क्रिप्टो बाजार में बढ़ी अस्थिरता
बिटकॉइन की गिरावट का असर अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी पर भी देखने को मिला। कई डिजिटल एसेट्स में भी कमजोरी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि क्रिप्टो बाजार फिलहाल वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता से प्रभावित हो रहा है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है, लेकिन निवेशकों को किसी भी निर्णय से पहले बाजार की स्थिति, जोखिम और दीर्घकालिक रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। वित्तीय सलाहकारों का सुझाव है कि केवल सोशल मीडिया या अफवाहों के आधार पर निवेश निर्णय लेने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना चाहिए।
आगे क्या रहेगा नजरिया?
अब निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की चाल और वैश्विक बाजारों के रुख पर रहेगी। यदि डॉलर मजबूत बना रहता है, तो क्रिप्टो बाजार पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं, सकारात्मक आर्थिक संकेत मिलने पर बिटकॉइन में फिर से सुधार की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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