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दतिया में BJP का बड़ा सरप्राइज! नरोत्तम मिश्रा नहीं, आशुतोष तिवारी पर खेला दांव

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Smiling man beside orange BJP flags with white lotus symbols; red Hindi news banner across the bottom shows a headline.
Source: BJP & (X)
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The Journalist News (Lucknow): मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उम्मीदवार के चयन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। लंबे समय से यह चर्चा थी कि पार्टी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को मैदान में उतारा जाएगा। हालांकि, पार्टी ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। बीजेपी के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। माना जा रहा है कि संगठन में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाने और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े अनुभव के कारण पार्टी ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है।

नरोत्तम मिश्रा के नाम की थी चर्चा

उपचुनाव की घोषणा के बाद नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया में सक्रिय दिखाई दिए। उन्होंने कई जनसभाओं और बैठकों में भाग लिया, जिससे यह कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी उन्हें ही उम्मीदवार बनाएगी। चर्चा तो यहां तक रही कि उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, जिसके बाद उनके चुनाव लड़ने की संभावना और मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होने पर बीजेपी ने अलग फैसला लेते हुए आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगा दी।

Source: X (Twitter)

क्यों चुने गए आशुतोष तिवारी?

पार्टी सूत्रों के अनुसार, आशुतोष तिवारी का संगठन में लंबे समय का अनुभव है। वह वर्षों से पार्टी और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे RSS के समर्पित कार्यकर्ता भी रहे हैं और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। बीजेपी नेतृत्व ने उनकी कार्यशैली, संगठन क्षमता और क्षेत्रीय सक्रियता को ध्यान में रखते हुए उन्हें टिकट देने का निर्णय लिया।

आगे पढ़िए: ‘तमिलनाडु में BJP को रोकेंगे’, CPM नेताओं से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर का बड़ा बया

चुनावी समीकरणों पर नजर

दतिया उपचुनाव को मध्य प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। ऐसे में बीजेपी ने उम्मीदवार चयन में संगठनात्मक अनुभव और स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें संगठन से जुड़े और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

आशुतोष तिवारी के उम्मीदवार घोषित होने के बाद दतिया की राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें चुनाव प्रचार और विपक्ष की रणनीति पर टिकी हैं। उपचुनाव के दौरान विभिन्न दलों के बीच मुकाबला दिलचस्प रहने की संभावना है। बीजेपी अपने नए उम्मीदवार के साथ मैदान में उतर चुकी है, जबकि विपक्ष भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है।

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