The Journalist News (Lucknow): भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने कहा है कि केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को तेज़ी से बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के सभी मंत्रालयों को AI अपनाने के आह्वान के बाद कई मंत्रालयों ने अपनी आवश्यकताओं के आधार पर प्रस्ताव भेजे हैं। एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार को AI के उपयोग से जुड़े कुल 762 सुझाव प्राप्त हुए हैं और इन पर विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में AI को लेकर अलग कानून बनाने पर भी विचार किया जाएगा, हालांकि इसके लिए पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जाएगी।
मंत्रालयों से मिले AI आधारित प्रस्ताव
एस. कृष्णन ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा सभी मंत्रालयों को अपने-अपने कार्यों में AI का उपयोग बढ़ाने का निर्देश दिए जाने के बाद कई विभागों ने अपनी जरूरतों के अनुरूप प्रस्ताव तैयार किए हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाना है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मंत्रालयों की आवश्यकताएं अलग हैं, इसलिए उनके AI समाधान भी अलग हो सकते हैं। इसी कारण मंत्रालयों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।

762 सुझावों पर चल रहा है काम
MeitY सचिव ने बताया कि अब तक AI से संबंधित 762 सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सुझावों का मूल्यांकन किया जा रहा है और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी व्यवहारिकता पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि उसे इस तरह लागू करना है जिससे नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकें और सरकारी कामकाज अधिक कुशल बन सके।
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AI कानून पर भी शुरू होगी चर्चा
AI के लिए अलग कानून बनाए जाने के सवाल पर एस. कृष्णन ने कहा कि इस विषय पर अभी विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा शुरू करनी होगी। उन्होंने कहा कि पहले यह समझना जरूरी है कि उद्योग, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, तकनीकी संस्थान और अन्य संबंधित पक्ष AI नियमन को किस रूप में देखते हैं। उनके अनुसार, सभी पक्षों की राय जानने के बाद ही किसी संभावित कानून का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
संतुलित नियमन पर रहेगा जोर
उन्होंने संकेत दिया कि AI जैसी तेजी से विकसित हो रही तकनीक के लिए ऐसा नियामक ढांचा तैयार करना होगा जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ जवाबदेही और सुरक्षा भी सुनिश्चित करे। सरकार का मानना है कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है, ताकि तकनीक के विकास और उसके सुरक्षित उपयोग के बीच संतुलन बनाया जा सके।
डिजिटल इंडिया मिशन को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी मंत्रालयों में AI का व्यापक उपयोग होने से प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक तेज़, सटीक और प्रभावी हो सकती हैं। इससे नीति निर्माण, डेटा विश्लेषण, सार्वजनिक सेवाओं और नागरिक सुविधाओं में भी सुधार की संभावना बढ़ेगी। एस. कृष्णन के बयान से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार AI को सरकारी कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। साथ ही, AI के जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में नियामक ढांचा तैयार करने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में भारत की डिजिटल गवर्नेंस और तकनीकी क्षमताओं को नई दिशा मिल सकती है।
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