ओडिशा सरकार ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तंबाकू और निकोटीन युक्त सभी उत्पादों पर राज्यभर में पूर्ण प्रतिबंध लगाने का बड़ा फैसला किया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। सरकार के इस कदम को तंबाकू नियंत्रण की दिशा में अब तक के सबसे सख्त फैसलों में से एक माना जा रहा है। इसके तहत अब राज्य में किसी भी रूप में तंबाकू या निकोटीन युक्त उत्पादों का निर्माण, भंडारण, परिवहन, व्यापार और बिक्री पूरी तरह से गैरकानूनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट और FSSAI के निर्देशों का पालन
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों और FSSAI की गाइडलाइंस के अनुरूप लिया गया है। लंबे समय से यह चिंता जताई जा रही थी कि तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पाद खाद्य सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन करते हुए खुलेआम बाजार में बेचे जा रहे हैं। FSSAI पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी खाद्य पदार्थ में तंबाकू या निकोटीन का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कई उत्पाद अलग-अलग नामों और पैकेजिंग के जरिए बाजार में मौजूद थे।
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त प्रावधान
नया प्रतिबंध Food Safety and Standards Act, 2006 के अंतर्गत लागू किया गया है। खासतौर पर
Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Regulations, 2011 के नियम 2.3.4 के तहत यह कार्रवाई की गई है।
इस नियम के अनुसार अब ओडिशा में:
- तंबाकू या निकोटीन युक्त उत्पादों का
- निर्माण
- भंडारण
- परिवहन
- व्यापार
- बिक्री
पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

किन उत्पादों पर लागू होगा बैन
इस प्रतिबंध के दायरे में वे सभी उत्पाद शामिल हैं, जिनमें तंबाकू या निकोटीन किसी भी मात्रा या रूप में मौजूद है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- गुटखा
- पान मसाला
- जर्दा
- खैनी
- तंबाकू मिश्रित माउथ फ्रेशनर
- अन्य खाद्य वस्तुएं जिनमें तंबाकू या निकोटीन मिला हो
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बैन चबाने योग्य और धूम्रपान योग्य, दोनों प्रकार के उत्पादों पर समान रूप से लागू होगा।
पैकेजिंग, नाम या ब्रांड से नहीं मिलेगी छूट
सरकार की अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि प्रतिबंध:
- फ्लेवर वाले
- खुशबूदार
- पैकेट में बंद
- खुले में बिकने वाले
- किसी भी ब्रांड नाम से बिकने वाले
सभी उत्पादों पर लागू होगा।
चाहे उत्पाद एकल पैकेट में बेचे जाएं या मल्टीपैक में, चाहे वे पैकेज्ड हों या अनपैकेज्ड — नियम सभी पर समान रूप से लागू रहेगा। सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि नाम बदलकर या नए ब्रांड के तहत बेचने की कोशिश को कानून से बचने का प्रयास माना जाएगा।
मौखिक तंबाकू उत्पाद भी पूरी तरह प्रतिबंधित
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया:
“इस प्रतिबंध में सभी प्रकार के मौखिक तंबाकू उत्पाद शामिल हैं, चाहे वे बनाए जा रहे हों, बेचे जा रहे हों, जमा किए गए हों या उपभोग किए जा रहे हों। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के चलते इस फैसले को मजबूत कानूनी आधार मिला है।”
इसका मतलब साफ है कि केवल बिक्री ही नहीं, बल्कि भंडारण और उपभोग भी कानून के दायरे में आएगा।
2013 के पुराने आदेश को किया गया निरस्त
सरकार ने बताया कि यह नया आदेश 3 जनवरी 2013 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी पुराने नोटिफिकेशन की जगह लेगा। पिछले आदेश के बावजूद, बाजार में कई ऐसे उत्पाद मौजूद थे जो अलग-अलग नामों और पैकेजिंग के जरिए बेचे जा रहे थे। नए नियमों में इन सभी खामियों को दूर करते हुए कानूनी प्रावधानों को और सख्त किया गया है।
सरकारी अधिसूचना में क्या कहा गया
अधिसूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया है:
“बाजार में कई नामों से तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पाद उपलब्ध हैं। ऐसे उत्पादों का सेवन आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।”
सरकार का मानना है कि इन उत्पादों पर पूरी तरह रोक लगाए बिना सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना संभव नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पाद:
- गले के कैंसर
- मुंह के कैंसर
- फेफड़ों की बीमारी
- हृदय रोग
- आंतरिक अंगों की गंभीर समस्याओं
का मुख्य कारण हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, भारत में ओरल कैंसर के मामलों की बड़ी वजह गुटखा और खैनी जैसे उत्पाद हैं।
बच्चों और युवाओं पर सबसे ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे और युवा वर्ग इन उत्पादों के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। रंग-बिरंगी पैकेजिंग और फ्लेवर के कारण युवा जल्दी इसकी लत का शिकार हो जाते हैं। निकोटीन एक अत्यधिक नशे की लत लगाने वाला रसायन है, जो मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करता है। कम उम्र में इसके सेवन से:
- मानसिक विकास रुक सकता है
- पढ़ाई और व्यवहार पर असर पड़ता है
- लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं
लंबे समय तक रहने वाले दुष्प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तंबाकू और निकोटीन का सेवन:
- रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर करता है
- शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है
- कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है
यही कारण है कि सरकार ने इसे जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नियंत्रित करने का फैसला किया है।
व्यापारियों और दुकानदारों को चेतावनी
राज्य सरकार ने दुकानदारों, थोक विक्रेताओं और निर्माताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस आदेश का सख्ती से पालन करें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ:
- जुर्माना
- लाइसेंस रद्द
- कानूनी कार्रवाई
की जा सकती है।
जनता से सहयोग की अपील
सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे तंबाकू और निकोटीन उत्पादों से दूरी बनाएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। साथ ही, यदि कहीं भी प्रतिबंधित उत्पाद बिकते दिखाई दें तो स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी दें।
सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा सरकार का यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है। यदि इसे सख्ती से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में:
- कैंसर के मामलों में कमी
- स्वास्थ्य खर्च में गिरावट
- युवाओं में नशे की लत कम
हो सकती है।
आगे पढ़िए: 26 जनवरी से पहले आतंकी साजिश का अलर्ट, दिल्ली हाई अलर्ट पर
Leave a comment