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‘संविधान मेरे साथ है, मुझे किसी का डर नहीं’ RSS को लेकर प्रियंक खड़गे का बड़ा बयान’

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Man in a gray vest speaks at a microphone; Constitution of India book appears on the left.
Source: Frontline
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The Journalist News (Lucknow): कर्नाटक सरकार के मंत्री Priyank Kharge ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को यह लगता है कि उन्हें डराकर या दबाव बनाकर चुप कराया जा सकता है, तो यह उनकी गलतफहमी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनके साथ संविधान है, तो उन्हें किसी बात का भय नहीं है। प्रियंक खड़गे का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति में विभिन्न मुद्दों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

‘हमें चुप नहीं कराया जा सकता’

मीडिया से बातचीत के दौरान प्रियंक खड़गे ने कहा कि अगर कुछ लोगों को लगता है कि वे उन्हें चुप करा देंगे, तो वे गलत हैं। उन्होंने कहा कि वे कर्नाटक में RSS के अस्तित्व और उससे जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को सवाल पूछने और अपनी बात रखने का अधिकार है और इस अधिकार का उपयोग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

‘संविधान मेरे साथ है’

Maroon leather-bound copy of The Constitution of India with gold embossing, resting on an open book rack.
Source LiveLaw

प्रियंक खड़गे ने अपने बयान में भारतीय संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि जब संविधान उनके साथ है, तब उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है। इसलिए वे अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत अपनी बात रखते रहेंगे।

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राजनीतिक बयान पर बढ़ी चर्चा

प्रियंक खड़गे के इस बयान के बाद कर्नाटक की राजनीति में बहस तेज होने की संभावना है। उनके बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। हालांकि, फिलहाल इस बयान पर RSS या अन्य संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

लोकतांत्रिक अधिकारों पर दिया जोर

अपने संबोधन में प्रियंक खड़गे ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती संविधान और कानून के शासन में निहित है। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात कहता है, तो उसे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगी।

बयान के राजनीतिक मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का विषय बन सकते हैं। राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मुद्दों पर पहले से ही तीखी बहस होती रही है और इस बयान ने उस बहस को और तेज कर दिया है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बयान पर अन्य राजनीतिक दल और संबंधित संगठन किस प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं।

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Sanskriti Tyagi
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