Home राष्ट्रीय हूल दिवस पर PM मोदी का नमन, बोले- ‘सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो का बलिदान हमेशा देता रहेगा नई ऊर्जा’
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हूल दिवस पर PM मोदी का नमन, बोले- ‘सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो का बलिदान हमेशा देता रहेगा नई ऊर्जा’

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Circular inset showing Narendra Modi speaking in front of Indian flags, flanked by two golden statues draped in green, with a red Hindi caption banner beneath.
Source: AI
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The Journalist News (Lucknow): प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हूल दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए आदिवासी समाज के वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा कर कहा कि हूल दिवस मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आदिवासी समाज के अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति का सशक्त प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में Sido Murmu, Kanhu Murmu, Chand Murmu, Bhairav Murmu, Phulo Murmu और Jhano Murmu को याद करते हुए उनके बलिदान को भारत के इतिहास का गौरवशाली अध्याय बताया।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि हूल दिवस हमारे आदिवासी समाज की उस अद्भुत भावना का प्रतीक है, जो मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन तक न्योछावर करने को तैयार रहती है। उन्होंने लिखा कि भारतीय इतिहास के इस गौरवपूर्ण अवसर पर वे विदेशी शासन के अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहने वाले सभी वीर योद्धाओं सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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आदिवासी अस्मिता की रक्षा का संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन महान सेनानियों ने आदिवासी समाज की अस्मिता, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए जो संघर्ष और बलिदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इन वीरों के त्याग और साहस की गाथा देशवासियों के हृदय में हमेशा नई ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का संचार करती रहेगी।

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क्या है हूल दिवस?

हूल दिवस प्रत्येक वर्ष 30 जून को मनाया जाता है। यह दिन 1855 के संथाल हूल (विद्रोह) की याद में मनाया जाता है, जब संथाल समुदाय ने ब्रिटिश शासन और शोषण के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया था। इस विद्रोह का नेतृत्व सिदो और कान्हू मुर्मू के साथ उनके भाइयों चांद और भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो और झानो ने किया था। इतिहासकार इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती और महत्वपूर्ण जनआंदोलनों में से एक मानते हैं।

देशभर में हुए कार्यक्रम

हूल दिवस के अवसर पर झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और अन्य राज्यों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई स्थानों पर आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई और उनके योगदान को याद किया गया। प्रधानमंत्री का यह संदेश भी सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और लोग आदिवासी वीरों के बलिदान को नमन कर रहे हैं। हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के संघर्ष का प्रतीक भी माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश के माध्यम से देशवासियों से इन महान योद्धाओं के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

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