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भारत ने रचा नया अंतरिक्ष इतिहास! निजी रॉकेट ‘विक्रम-1’ की सफल उड़ान, दुनिया को दिखाई नई ताकत

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The Journalist News (Lucknow): भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने शनिवार को एक नया इतिहास रच दिया। हैदराबाद स्थित स्टार्टअप Skyroot Aerospace द्वारा विकसित देश के पहले निजी ऑर्बिटल-श्रेणी (Orbital-Class) रॉकेट विक्रम-1 (Vikram-1) ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से सफल उड़ान भरते हुए छह पेलोड (Payloads) को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित किया। इस सफलता के साथ Skyroot Aerospace भारत की पहली निजी कंपनी बन गई है जिसने सफलतापूर्वक ऑर्बिटल स्पेस मिशन को अंजाम दिया। ‘मिशन आगमन’ (Mission Aagaman) नाम से संचालित इस मिशन को भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञ इसे भारत का “SpaceX Moment” भी बता रहे हैं, क्योंकि यह निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।

भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए ऐतिहासिक दिन

अब तक भारत में अंतरिक्ष अभियानों का नेतृत्व मुख्य रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) करता रहा है। लेकिन विक्रम-1 की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय निजी कंपनियां भी अब वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी भागीदारी को नई गति देने वाला माना जा रहा है।

46 साल बाद दोहराया गया ऐतिहासिक पल

विक्रम-1 का प्रक्षेपण भारत के पहले सफल उपग्रह प्रक्षेपण SLV-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि के 46 वर्ष बाद हुआ। वर्ष 1980 में SLV-3 ने रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया था। अब विक्रम-1 की सफलता को उसी विरासत को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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छह पेलोड लेकर अंतरिक्ष पहुंचा विक्रम-1

इस मिशन के दौरान रॉकेट ने कुल छह पेलोड अंतरिक्ष में पहुंचाए। इनमें दो उपग्रह और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा विकसित कई तकनीकी प्रदर्शन (Technology Demonstrators) शामिल थे। इन पेलोड का उद्देश्य नई अंतरिक्ष तकनीकों का परीक्षण करना और भविष्य के व्यावसायिक मिशनों के लिए आवश्यक डेटा जुटाना है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश भी पहुंचा अंतरिक्ष

इस मिशन की सबसे भावनात्मक बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हस्तलिखित एक पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष में भेजा गया। इस पोस्टकार्ड पर “वंदे मातरम्” लिखा था। प्रधानमंत्री के इस संदेश के साथ वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और अंतरिक्ष विशेषज्ञों के पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष में भेजे गए। इससे यह मिशन केवल तकनीकी उपलब्धि ही नहीं, बल्कि देश के लिए भावनात्मक महत्व भी रखता है।

आधुनिक तकनीक से लैस है विक्रम-1

करीब सात मंजिला इमारत जितनी ऊंचाई वाले विक्रम-1 रॉकेट में तीन ठोस ईंधन (Solid Fuel) चरण और एक पुनः चालू किए जा सकने वाला तरल ईंधन (Restartable Liquid-Powered Upper Stage) शामिल है। कार्बन-कॉम्पोजिट संरचना के कारण यह रॉकेट हल्का है और इसकी ऊपरी स्टेज एक ही मिशन में कई छोटे उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करने में सक्षम है।

पूर्व ISRO वैज्ञानिकों का सपना हुआ साकार

Skyroot Aerospace की स्थापना वर्ष 2018 में ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी। कंपनी ने इससे पहले वर्ष 2022 में भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस (Vikram-S) सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। विक्रम-1 की सफलता ने कंपनी को वैश्विक निजी अंतरिक्ष उद्योग की अग्रणी कंपनियों की सूची में ला खड़ा किया है।

भारत के लिए नए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रम-1 की सफलता से भारत की वैश्विक व्यावसायिक अंतरिक्ष बाजार में स्थिति और मजबूत होगी। दुनिया भर में छोटे उपग्रहों के तेज़, किफायती और विश्वसनीय प्रक्षेपण की मांग लगातार बढ़ रही है। ISRO ने जिस रास्ते की शुरुआत की थी, अब भारतीय निजी स्टार्टअप उस राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। विक्रम-1 की सफल उड़ान यह संकेत देती है कि भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

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