The Journalist News (Lucknow): जंतर-मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचीं और आंदोलनरत सोनम वांगचुक से मुलाकात कर अपना समर्थन व्यक्त किया। उनके साथ सांसद धर्मेंद्र यादव और नरोत्तम पटेल भी मौजूद रहे। सपा के प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। सोनम वांगचुक कथित तौर पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में हुई अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। आंदोलन को लेकर छात्रों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच लगातार चर्चा बनी हुई है।
जंतर-मंतर पहुंचीं डिंपल यादव
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर सोनम वांगचुक और अन्य आंदोलनकारियों से बातचीत की। उन्होंने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुने जाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इस दौरान सांसद धर्मेंद्र यादव और नरोत्तम पटेल भी उनके साथ मौजूद रहे। सपा प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए सरकार से छात्रों और प्रदर्शनकारियों की चिंताओं पर उचित ध्यान देने की अपील की।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए स्वास्थ्य निगरानी के निर्देश
इसी बीच आंदोलन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति भी सामने आई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर प्रतिदिन निगरानी रखें। अदालत ने यह भी कहा कि यदि उनकी तबीयत बिगड़ती है या चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है तो उन्हें तुरंत आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। अदालत का यह निर्देश प्रदर्शनकारी की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, ताकि भूख हड़ताल के दौरान किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी गंभीर स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
NEET को लेकर उठ रही हैं मांगें
सोनम वांगचुक का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। उनका आंदोलन परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग पर केंद्रित है। हालांकि, इस विषय पर संबंधित एजेंसियों और सरकार की ओर से समय-समय पर विभिन्न स्पष्टीकरण और कार्रवाई की जानकारी भी दी जाती रही है। आंदोलन के बीच छात्रों और अभिभावकों की नजरें आगे की प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक समर्थन
जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन मिलने से इसकी चर्चा और तेज हो गई है। प्रदर्शनकारी लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं और सरकार से संवाद की उम्मीद जता रहे हैं।
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