अयोध्या में खुद को भाजपा से जुड़ा बताने वाले सच्चिदानंद पांडेय एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उन पर जगद्गुरु परमहंस से दो लाख रुपये हड़पने का आरोप लगा है। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं भाजपा संगठन ने भी स्पष्ट किया है कि सच्चिदानंद पांडेय पार्टी के सदस्य नहीं हैं और उनका भाजपा से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार जगद्गुरु परमहंस ने सच्चिदानंद पांडेय पर दो लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। आरोपों के आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी तथ्यों को एकत्र कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे की कार्रवाई किस दिशा में होगी। एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। संत समाज और राजनीतिक हलकों में भी इस घटना को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

पहले भी विवादों में रह चुके हैं सच्चिदानंद पांडेय
यह पहला अवसर नहीं है जब सच्चिदानंद पांडेय किसी विवाद को लेकर सुर्खियों में आए हों। पिछले कुछ वर्षों में उनका नाम कई विवादित घटनाओं से जुड़ता रहा है। राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे सच्चिदानंद पांडेय ने पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। इसके अलावा वे विभिन्न राजनीतिक मंचों पर भी दिखाई देते रहे हैं। राजनीतिक गतिविधियों के चलते उनका नाम अक्सर चर्चाओं में बना रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार उनकी राजनीतिक पहचान लगातार बदलती रही है और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें और मंच साझा करने के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में हुआ था विवाद
करीब कुछ समय पहले पूर्व विधायक खब्बू तिवारी की माता के तेरहवीं संस्कार कार्यक्रम के दौरान भी सच्चिदानंद पांडेय विवादों में आ गए थे। बताया जाता है कि उस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya भी मौजूद थे। इसी दौरान फोटो खिंचवाने को लेकर उनका भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष संजीव सिंह के साथ विवाद हो गया था। यह घटना उस समय भी काफी चर्चा में रही थी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हुई कहासुनी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि बाद में मामला शांत हो गया, लेकिन विवाद की चर्चा लंबे समय तक होती रही।
भाजपा सोशल मीडिया प्रभारी से भी हुआ था विवाद
सच्चिदानंद पांडेय का नाम हाल ही में एक और विवाद में सामने आया था। करीब 10 दिन पहले भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी प्रवेश मिश्रा ने उनके खिलाफ गाली-गलौज, अभद्रता और धमकी देने के आरोप लगाए थे। इस मामले में तारुन थाने में उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अनुचित व्यवहार करते हुए धमकी दी थी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। अब जगद्गुरु परमहंस से जुड़े नए आरोप सामने आने के बाद उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या बढ़ गई है।
भाजपा ने किया किनारा
मामले के सामने आने के बाद भाजपा संगठन ने सच्चिदानंद पांडेय से दूरी बना ली है। भाजपा जिलाध्यक्ष Radheshyam Tyagi ने साफ कहा है कि सच्चिदानंद पांडेय भाजपा के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सच्चिदानंद पांडेय न तो वर्तमान में भाजपा संगठन का हिस्सा हैं और न ही वह अयोध्या जिले के निवासी हैं। जिलाध्यक्ष के अनुसार लोकसभा चुनाव के बाद वे समाजवादी पार्टी के साथ चले गए थे। राधेश्याम त्यागी ने कहा कि इसके बाद वह कब और कैसे भाजपा से जुड़ने का दावा करने लगे, इसकी जानकारी पार्टी के किसी जिम्मेदार पदाधिकारी को नहीं है।
कानून से ऊपर कोई नहीं
भाजपा जिलाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी भी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा क्यों न हो। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में किसी भी आरोपी को केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उनके इस बयान को संगठन की ओर से स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि पार्टी किसी भी विवादित गतिविधि का समर्थन नहीं करती।
संत समाज में चर्चा का विषय बना मामला
जगद्गुरु परमहंस से जुड़े होने के कारण यह मामला संत समाज में भी चर्चा का विषय बन गया है। अयोध्या धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है। ऐसे में किसी संत से जुड़े आर्थिक विवाद की खबर सामने आने के बाद लोगों की दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर कई लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस को सभी तथ्यों की गहन जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस जांच जारी है। जांच एजेंसियां शिकायत, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एफआईआर दर्ज होना जांच प्रक्रिया की शुरुआत है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा। इधर, अयोध्या में इस मामले को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हैं। राजनीतिक गतिविधियों और पूर्व विवादों के कारण यह मामला आम लोगों के बीच भी चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई है।
Leave a comment