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लखनऊ गोल्फ क्लब मामले में बड़ा एक्शन, 14 साल बाद पूर्व सचिव के खिलाफ NBW जारी

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Close-up of a judge's gavel on a desk with a blurred background and a red Hindi news ticker across the bottom.
Source:AI
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The journalist News (Lucknow): लखनऊ गोल्फ क्लब से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के पुराने मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। क्लब के पूर्व सचिव देवेश रस्तोगी के खिलाफ सेशन कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। यह कार्रवाई उन आरोपों के संबंध में की गई है जो उनके कार्यकाल के दौरान सामने आए थे। जानकारी के अनुसार, देवेश रस्तोगी पर वर्ष 2012 में वित्तीय गड़बड़ियों और बजट के कथित दुरुपयोग के आरोप लगे थे। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी। अब करीब 14 वर्ष बाद अदालत की ओर से गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

क्या हैं आरोप?

सूत्रों के मुताबिक, देवेश रस्तोगी के कार्यकाल के दौरान क्लब के वित्तीय प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में पाया गया था कि बजट का उपयोग निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं किया गया। मामले में करीब दो करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। आरोप है कि क्लब के धन के उपयोग और लेखा-जोखा में कई स्तरों पर गड़बड़ियां पाई गई थीं, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।

Source: AI

1.50 करोड़ रुपये की हुई रिकवरी

जांच के दौरान संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों द्वारा वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 1.50 करोड़ रुपये की राशि की रिकवरी की जा चुकी है। हालांकि, अब भी लगभग 77 लाख रुपये के खर्च और उसके लेखा-जोखा को लेकर सवाल बने हुए हैं। जांच में इस राशि का स्पष्ट हिसाब नहीं मिल सका था, जिसके चलते मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ता रहा।

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अदालत ने जारी किया गैर जमानती वारंट

मामले की सुनवाई के दौरान सेशन कोर्ट ने देवेश रस्तोगी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। अदालत के इस कदम को मामले में महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है। गैर-जमानती वारंट जारी होने का अर्थ है कि संबंधित व्यक्ति को अदालत के समक्ष पेश करने के लिए पुलिस आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के निर्देशों के अनुसार चलेगी।

फिर चर्चा में आया पुराना मामला

करीब डेढ़ दशक पुराने इस मामले में नई कार्रवाई होने के बाद लखनऊ गोल्फ क्लब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। क्लब से जुड़े वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक या संस्थागत धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में लंबी जांच और कानूनी प्रक्रिया के बावजूद कार्रवाई होना संस्थागत जवाबदेही की दिशा में अहम माना जाता है।

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