The Journalist News (Lucknow): उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित नागरासू गुरुद्वारा में तीन दिन तक चले गतिरोध और उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश सीमा पर विरोध मार्च के बाद भी मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। फिलहाल निहंग सिखों और उत्तराखंड सरकार के बीच उनकी मांगों को लेकर बातचीत जारी है। इस बीच हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में एक निहंग सिख ने मीडिया से बातचीत करते हुए पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
निहंग सिख ने क्या कहा?
निहंग सिख ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड प्रशासन और उत्तराखंड तथा पंजाब से जुड़े श्रद्धालुओं (संगत) के बीच विवाद चल रहा है। उनका दावा है कि श्री हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान दर्शन के लिए जा रहे निहंग सिंहों के एक जत्थे के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, मारपीट की, थर्ड-डिग्री यातना दी और उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जेल भेज दिया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

विरोध मार्च निकालने का दावा
निहंग सिख ने कहा कि इस घटना के विरोध में विभिन्न निहंग सिंह दलों और अलग-अलग जत्थों के जत्थेदार एकजुट होकर मार्च पर निकले हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य कथित अत्याचार के खिलाफ न्याय की मांग करना और अपने साथियों के लिए कानूनी राहत सुनिश्चित करना है।
सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें
निहंग सिख ने उत्तराखंड सरकार से मांग की कि गिरफ्तार किए गए निहंग सिंहों के खिलाफ दर्ज FIR को तत्काल वापस लिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि जिन स्थानीय लोगों पर निहंग सिंहों पर हमला करने का आरोप लगाया जा रहा है, उनके खिलाफ भी क्रॉस-FIR दर्ज की जाए ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
बातचीत जारी, समाधान की उम्मीद
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीन दिन तक चले गतिरोध और विरोध प्रदर्शन के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। अभी तक किसी अंतिम समझौते या निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है ताकि स्थिति सामान्य हो सके और हेमकुंड साहिब यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहे।
जांच और आधिकारिक पक्ष का इंतजार
मामले में लगाए गए आरोप फिलहाल संबंधित पक्षों के बयान हैं। इनकी पुष्टि जांच और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही हो सकेगी। ऐसे संवेदनशील मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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