The Journalist News (Lucknow): तमिल फिल्म उद्योग के दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और पटकथा लेखक के. भाग्यराज का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद चेन्नई के अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से पूरे तमिल फिल्म उद्योग और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई।
फिल्मी जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
के. भाग्यराज के निधन के बाद तमिल सिनेमा के कई अभिनेता, निर्देशक और फिल्मी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अभिनेता कमल हासन, राघव लॉरेंस, सिबिराज समेत कई कलाकारों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक संदेशों के जरिए उनके योगदान को याद किया। फिल्मी हस्तियों ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली पटकथा लेखकों में से एक बताते हुए कहा कि उनकी फिल्मों और कहानी कहने की शैली ने कई पीढ़ियों के फिल्मकारों को प्रेरित किया।

पांच दशक तक किया दर्शकों का मनोरंजन
के. भाग्यराज ने लगभग पांच दशकों तक तमिल सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अभिनेता, निर्देशक, लेखक और पटकथा लेखक के रूप में काम किया। उनकी फिल्मों में पारिवारिक रिश्ते, सामाजिक मुद्दे, हास्य और भावनात्मक कहानियों का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता था। उन्होंने ‘मुंधानई मुदिचू’, ‘अंधा 7 नाटकल’, ‘चिन्ना वीडू’, ‘सुंदरा कांडम’ और ‘डार्लिंग डार्लिंग डार्लिंग’ जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन और अभिनय किया।
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कई कलाकारों को दिया बड़ा मंच
भाग्यराज ने अपने करियर के दौरान कई नए कलाकारों को फिल्म उद्योग में अवसर दिया। उनकी कहानी लिखने की शैली और निर्देशन की वजह से उन्हें तमिल सिनेमा में “स्क्रीनप्ले किंग” के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने केवल अभिनय और निर्देशन तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भारतीय सिनेमा में पटकथा लेखन की नई शैली को लोकप्रिय बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अंतिम दिनों तक रहे सक्रिय
रिपोर्टों के अनुसार, के. भाग्यराज अपने अंतिम दिनों तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय थे। कुछ दिन पहले ही उन्हें अभिनेत्री-राजनेता खुशबू सुंदर की बेटी के विवाह समारोह में देखा गया था। उनके अचानक निधन की खबर ने फिल्म जगत को स्तब्ध कर दिया।
हमेशा याद किए जाएंगे के. भाग्यराज
के. भाग्यराज अपने पीछे पत्नी अभिनेत्री पूर्णिमा भाग्यराज, बेटे अभिनेता शंतनु भाग्यराज और बेटी सरन्या भाग्यराज को छोड़ गए हैं। उनके निधन को तमिल सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। फिल्म जगत का मानना है कि उनकी फिल्में, पटकथाएं और रचनात्मक दृष्टि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उनके योगदान को भारतीय सिनेमा हमेशा याद रखेगा.
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