Home शिक्षा भातखंडे विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 255 छात्रों को मिली डिग्री, 48 मेधावियों का हुआ सम्मान
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भातखंडे विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 255 छात्रों को मिली डिग्री, 48 मेधावियों का हुआ सम्मान

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The Journalist News (Lucknow): भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और संस्कृति की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ का 16वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने की। इस अवसर पर 255 विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 48 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत एवं अन्य पदकों से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि सभी विद्यार्थियों की उपाधियां और अंक प्रमाण-पत्र राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (NAD) पर डिजिटल रूप से अपलोड किए गए हैं, जिससे उन्हें देश-विदेश में सत्यापन और उपयोग की सुविधा मिलेगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों और बालिकाओं के लिए विशेष पहल

दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ा रहा। कार्यक्रम के दौरान जनपद गोंडा के 300 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं। साथ ही 300 बालिकाओं का एचपीवी (HPV) टीकाकरण भी कराया गया, जो महिलाओं के स्वास्थ्य और सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

राज्यपाल का संदेश: संस्कृति ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति

समारोह में डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का संदेश पढ़कर सुनाया। राज्यपाल ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय केवल संगीत सिखाने वाला संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना का जीवंत केंद्र है। यहां विद्यार्थी केवल स्वर और लय नहीं सीखते, बल्कि अनुशासन, साधना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे विश्वविद्यालय से केवल डिग्री लेकर न जाएं, बल्कि भारतीय संस्कृति और संगीत की विरासत को दुनिया तक पहुंचाने का संकल्प भी लें।

आगे पढ़िए: SGPGI का 30वां दीक्षांत समारोह आज, पहली बार मिलेगा गवर्नर गोल्ड मेडल, 279 विद्यार्थियों को मिलेंगी उपाधियां

पंडित कुमार बोस के योगदान की सराहना

राज्यपाल ने समारोह के मुख्य अतिथि एवं विश्वविख्यात तबला वादक पंडित कुमार बोस के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने 150 से अधिक संगीत रिकॉर्डिंग, विश्वभर में प्रस्तुतियों और भारतीय संगीत के प्रचार-प्रसार के लिए किए गए उनके योगदान को प्रेरणादायक बताया। पंडित कुमार बोस को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

तकनीक का स्वागत, लेकिन कला की आत्मा सर्वोपरि

अपने संदेश में राज्यपाल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन मशीनें कभी कलाकार की संवेदना, साधना और आत्मा का स्थान नहीं ले सकतीं। उन्होंने कहा कि AI स्वर उत्पन्न कर सकती है, चित्र बना सकती है और शब्दों को जोड़ सकती है, लेकिन वह कलाकार की अनुभूति और भावनात्मक गहराई को व्यक्त नहीं कर सकती। विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग करते हुए भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और कला की आत्मा को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का संस्मरण किया साझा

अपने संबोधन में डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षण काल का एक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां से मिलने का अवसर मिला था। उन्होंने बताया कि जब उस्ताद से भारतीय और पाश्चात्य संगीत के अंतर के बारे में पूछा गया तो उनका उत्तर था “यदि पाश्चात्य संगीत गुलाब का फूल है, तो हिन्दुस्तानी संगीत उस गुलाब की सुगंध है।”

विश्वविद्यालय में सुविधाएं होंगी और बेहतर

डॉ. बोबडे ने बताया कि राज्यपाल सचिवालय की समीक्षा के बाद विश्वविद्यालय में सीसीटीवी कैमरों, महिला छात्रावास में वाशिंग मशीन, बेहतर भोजन व्यवस्था, पुस्तकालय, प्रशासनिक भवन, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की पत्रिका एवं पुस्तक ‘संगीत सृष्टि’ का विमोचन भी किया गया। गोद लिए गए गांवों के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया तथा छात्रों ने जल संरक्षण विषय पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का यह 16वां दीक्षांत समारोह भारतीय संगीत, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।

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