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रिटायर्ड आर्मी मेजर का बड़ा आरोप: शराब नहीं पी थी, फिर भी ट्रैफिक पुलिस ने रोका घंटों

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Split image: a uniformed police official speaks at a press conference with microphones; right shows traffic police at night with flashing lights and a checkpoint scenario.
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The Journalist News Lucknow: हरियाणा के गुरुग्राम में ट्रैफिक पुलिस और एक रिटायर्ड आर्मी मेजर के बीच हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। चिकित्सकीय कारणों से सेवानिवृत्त हुए मेजर सिंह ने आरोप लगाया है कि ड्रंक-ड्राइविंग जांच के दौरान उनके और उनके परिवार के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। मामले के सामने आने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने जांच के आदेश दे दिए हैं। यह घटना उस समय हुई जब मेजर सिंह अपनी पत्नी और दो छोटी बेटियों के साथ रात का भोजन करने के बाद घर लौट रहे थे। रास्ते में ट्रैफिक पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ड्रंक-ड्राइविंग चेकिंग अभियान के दौरान उनकी गाड़ी को रोका गया।

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शुरुआती जांच में आया अलग परिणाम

मेजर सिंह के अनुसार, पुलिस ने उनका ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किया। उनका दावा है कि पहली जांच में अपेक्षा से अधिक रीडिंग दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के लिए इस्तेमाल किया गया माउथपीस पहले से उपयोग किया हुआ हो सकता था, जिसके कारण गलत परिणाम आया। मेजर का कहना है कि उन्होंने इस परिणाम पर आपत्ति जताई और दोबारा जांच की मांग की। इसके बाद दो और परीक्षण किए गए, जिनमें उनकी रीडिंग 13 मिलीग्राम बताई गई। यह कानूनी सीमा 30 मिलीग्राम से काफी कम थी। मेजर सिंह का कहना है कि दोबारा परीक्षण में स्पष्ट रूप से यह साबित हो गया था कि उन्होंने शराब नहीं पी थी और वे निर्धारित सीमा के भीतर थे।

एक घंटे से अधिक समय तक रोके रखने का आरोप

रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने आरोप लगाया कि दोबारा जांच में सामान्य परिणाम आने के बावजूद उन्हें और उनके परिवार को एक घंटे से अधिक समय तक रोके रखा गया। उनके मुताबिक, देर रात उनकी पत्नी और दोनों बेटियां भी उनके साथ मौजूद थीं। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी। मेजर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले परीक्षण के आधार पर चालान जारी कर दिया, जबकि बाद के परीक्षणों में वे निर्धारित सीमा के भीतर पाए गए थे।

मोबाइल फोन छीनने और अभद्र भाषा का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोपों में यह दावा भी शामिल है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने उनका मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। मेजर सिंह का आरोप है कि जब उन्होंने पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग करने या किसी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें ऐसा करने से रोका गया। उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

112 पर कॉल के बाद बदली स्थिति

मेजर सिंह के अनुसार, जब स्थिति सामान्य नहीं हुई तो मदद के लिए आपातकालीन नंबर 112 पर संपर्क किया गया। उन्होंने दावा किया कि सहायता पहुंचने की सूचना मिलने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी वहां से चले गए। इसके बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। घटना का विवरण सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर सामने आने के बाद लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

गुरुग्राम पुलिस ने दिए जांच के आदेश

मामला सार्वजनिक होने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। पुलिस प्रशासन ने कहा है कि पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाएगी। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी ACP सत्यपाल यादव को सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि किसी पुलिसकर्मी की ओर से नियमों का उल्लंघन या अनुचित व्यवहार पाया जाता है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

महिलाओं और बच्चों से जुड़े दिशा निर्देश

गुरुग्राम पुलिस ने यह भी बताया कि चेकिंग अभियान के दौरान महिलाओं और बच्चों की मौजूदगी वाले मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरतने के दिशा-निर्देश मौजूद हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, परिवारों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रोककर नहीं रखा जाना चाहिए और कार्रवाई के दौरान शिष्ट व्यवहार बनाए रखना आवश्यक है। इसी कारण अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या निर्धारित प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों का पालन किया गया था या नहीं।

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