The Journalist News (Lucknow): ब्रिटेन के सम्राट King Charles III ने निर्वासन (Exile) में रह रही अफगानिस्तान की महिला क्रिकेट टीम से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। अपने ही देश में क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध झेल रहीं इन खिलाड़ियों के साहस और संघर्ष की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी उनका जज्बा पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अफगान महिला क्रिकेटरों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय खेल जगत और मानवाधिकार संगठनों के बीच लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
अपने देश में खेलने की नहीं है अनुमति
Afghanistan women’s national cricket team की कई खिलाड़ी तालिबान के सत्ता में आने के बाद देश छोड़ने को मजबूर हुई थीं। अफगानिस्तान में महिलाओं के खेलों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वे अपने देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर पा रही हैं। इनमें से कई खिलाड़ी अब विदेशों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में रहकर प्रशिक्षण जारी रखे हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन की उम्मीद कर रही हैं।

किंग चार्ल्स ने बढ़ाया हौसला
मुलाकात के दौरान किंग चार्ल्स ने खिलाड़ियों के संघर्ष, धैर्य और खेल के प्रति समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीवित रखना असाधारण साहस का प्रतीक है। उन्होंने खिलाड़ियों से बातचीत कर उनके अनुभव भी सुने और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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तालिबान शासन के बाद बदली तस्वीर
2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और खेल गतिविधियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए। इसका सबसे अधिक असर महिला खिलाड़ियों पर पड़ा, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के अवसर लगभग समाप्त हो गए। कई खिलाड़ियों ने सुरक्षा कारणों से अफगानिस्तान छोड़ दिया और विदेशों में शरण ली।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत का समर्थन
दुनिया भर के कई क्रिकेट बोर्ड, खिलाड़ियों और खेल संगठनों ने अफगान महिला क्रिकेटरों के समर्थन में आवाज उठाई है। उनका कहना है कि खेल सभी के लिए समान अवसर का माध्यम होना चाहिए और खिलाड़ियों को राजनीतिक परिस्थितियों का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मुलाकातें इन खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ महिला खेलों के प्रति वैश्विक समर्थन का संदेश भी देती हैं।
संघर्ष के बीच उम्मीद कायम
निर्वासन में रहने के बावजूद अफगान महिला क्रिकेटर नियमित अभ्यास कर रही हैं और भविष्य में फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देख रही हैं। उनका मानना है कि परिस्थितियां बदलेंगी और एक दिन वे फिर अपने देश का प्रतिनिधित्व कर सकेंगी। किंग चार्ल्स की यह मुलाकात उनके संघर्ष को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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