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ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी बगावत बागी सांसदों का दावा सोमवार को स्पीकर से करेंगे मुलाकात

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Split image of Prime Minister Narendra Modi (left) and Mamata Banerjee (right) with hands pressed in a namaste gesture, red Hindi news ticker across the bottom.
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The Journalist News Lucknow: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती असंतोष की आवाजें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। पार्टी के बागी सांसदों का दावा है कि वे लोकसभा में खुद को “वास्तविक तृणमूल” के रूप में मान्यता दिलाने के लिए सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे। हाल के दिनों में TMC के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। बागी खेमे का दावा है कि उनके साथ बड़ी संख्या में सांसद और विधायक जुड़े हुए हैं, जिससे पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

बागी सांसदों का क्या दावा?

रिपोर्टों के अनुसार, बागी गुट का कहना है कि उसके साथ 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन है और वह सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा। बागी नेताओं का दावा है कि वे संसद में अलग पहचान और मान्यता की मांग करेंगे। हालांकि, विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में बागी सांसदों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में 19 सांसदों का समर्थन बताया गया है, जबकि पहले कुछ रिपोर्टों में 20 से अधिक सांसदों के असंतोष की चर्चा भी की गई थी।

सुदीप बंद्योपाध्याय को लेकर अटकलें

सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में वरिष्ठ TMC नेता Sudip Bandyopadhyay को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में उनके विद्रोही गुट में शामिल होने या उनकी विधायक पत्नी के किसी बागी गुट में जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस तरह के दावों को फिलहाल सत्यापित नहीं माना जा सकता। वर्तमान स्थिति में केवल आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय रिपोर्टों पर ही भरोसा करना उचित होगा।

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात क्यों अहम?

बागी सांसदों की प्रस्तावित मुलाकात को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए वे संसद में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर सकते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, बागी गुट खुद को “रियल TMC” के रूप में पेश करना चाहता है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला आधिकारिक TMC खेमे का कहना है कि ऐसे दावों का कानूनी आधार नहीं है और दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन मामलों की समीक्षा की जाएगी।

बंगाल में पहले से जारी है राजनीतिक उथल-पुथल

लोकसभा में उठे इस विवाद से पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी के भीतर मतभेदों की खबरें सामने आ चुकी हैं। कुछ बागी नेताओं ने दावा किया है कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक भी हैं। हालांकि इन दावों पर राजनीतिक बहस जारी है और अंतिम स्थिति संवैधानिक प्रक्रियाओं तथा विधानसभा एवं संसद के निर्णयों पर निर्भर करेगी।

ममता बनर्जी के सामने चुनौती

Mamata Banerjee के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। TMC लंबे समय से पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बागी सांसदों और पार्टी नेतृत्व के बीच होने वाले घटनाक्रम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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