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TATA Sons चेयरमैन ने FY26 में वेतन वृद्धि लेने से किया इनकार, ग्रुप के निवेश और नए कारोबारों पर बढ़ी चर्चा

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Tata logo on the left and a suited man on the right; news banner in Hindi about FY26 compensation for Tata Sons’ chairman (bar at bottom).
Source: AI and Moneycontrol.com
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The Journalist News (Lucknow): देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में शामिल टाटा ग्रुप से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। TATA संस के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए अपनी सैलरी में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं लेने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय समूह के भीतर पूंजी आवंटन (Capital Allocation) और कुछ नए कारोबारों के घाटे को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखरन ने स्वयं वेतन वृद्धि नहीं लेने की इच्छा जताई है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब TATA समूह अपने कई नए व्यवसायों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है और उनके वित्तीय प्रदर्शन को लेकर चर्चा चल रही है।

बोर्ड बैठक में लिया गया फैसला

Source: AI

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले सप्ताह TATA Sonsकी बोर्ड बैठक के साथ-साथ नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी की भी बैठक आयोजित की गई थी। इसी दौरान वेतन और अन्य प्रबंधन संबंधी विषयों पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि बैठक में चंद्रशेखरन ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस वर्ष किसी प्रकार की सैलरी बढ़ोतरी स्वीकार नहीं करेंगे। हालांकि इस विषय पर TATA Sons की ओर से आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

नोएल टाटा ने जताई थी चिंता

जानकारी के अनुसार, Noel Tata ने समूह के कुछ नए व्यवसायों में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश को लेकर चिंता व्यक्त की थी। TATA समूह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एयरलाइंस, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सेवाओं और अन्य उभरते क्षेत्रों में लगातार निवेश बढ़ा रहा है। इनमें से कई नए कारोबार अभी शुरुआती चरण में हैं और लाभप्रदता हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में पूंजी के उपयोग और निवेश पर रिटर्न को लेकर समूह के भीतर समीक्षा जारी है।

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चुनौतियों से गुजर रहा है कारोबारी माहौल

TATA समूह की कई कंपनियां पिछले कुछ समय से वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के प्रभाव का सामना कर रही हैं। विशेष रूप से एयरलाइन कारोबार पर इसका असर देखा गया है। एयर इंडिया के विस्तार और संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी समूह के लिए महत्वपूर्ण विषय बनी हुई हैं। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, सप्लाई चेन दबाव और लागत में वृद्धि जैसी स्थितियों ने भी कारोबारी प्रदर्शन को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में शीर्ष नेतृत्व द्वारा वेतन वृद्धि नहीं लेना एक सकारात्मक संदेश माना जा सकता है।

FY25 में कैसी रही टाटा समूह की वित्तीय स्थिति?

Source: AI

वित्त वर्ष 2025 के दौरान टाटा संस का कुल राजस्व (Revenue) 24 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) 17 प्रतिशत घटकर 28,898 करोड़ रुपये रह गया। यह आंकड़े दिखाते हैं कि समूह का कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है, लेकिन लाभप्रदता पर कुछ दबाव बना हुआ है। एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि TATA समूह के कुल मुनाफे में सबसे बड़ा योगदान Tata Consultancy Services का रहा। वित्त वर्ष 2025 में समूह के कुल लाभ का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा टीसीएस से आया।

पिछले साल कितना था वेतन पैकेज?

वित्त वर्ष 2025 में एन. चंद्रशेखरन को कुल 155.8 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक प्राप्त हुआ था। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक थी। उनके वेतन पैकेज का बड़ा हिस्सा प्रदर्शन आधारित (Performance Linked) था। इस पैकेज में लगभग 15.1 करोड़ रुपये वेतन और अन्य लाभों के रूप में शामिल थे, जबकि करीब 140.7 करोड़ रुपये प्रॉफिट-लिंक्ड कमीशन के रूप में दिए गए थे। यह दर्शाता है कि उनका अधिकांश पारिश्रमिक कंपनी के प्रदर्शन और लाभ से जुड़ा हुआ था।

क्या संकेत देता है यह फैसला?

कॉर्पोरेट जगत के जानकारों का मानना है कि चंद्रशेखरन का वेतन वृद्धि नहीं लेने का फैसला केवल वित्तीय निर्णय नहीं बल्कि एक नेतृत्व संदेश भी है। जब कोई कंपनी बड़े निवेश, विस्तार योजनाओं और लाभप्रदता से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हो, तब शीर्ष प्रबंधन द्वारा संयम दिखाना निवेशकों और कर्मचारियों दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। इस कदम को TATA समूह के भीतर जवाबदेही और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच के रूप में भी देखा जा रहा है।

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