नई दिल्ली। मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय दल की बैठक कई मायनों में ऐतिहासिक रही। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाल ही में सेना द्वारा चलाए गए सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए सम्मानित किया गया। लेकिन इस मीटिंग का सबसे चर्चित हिस्सा रहा प्रधानमंत्री का वह तंज, जिसमें उन्होंने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “शायद अब विपक्ष सोच रहा होगा कि क्या ऑपरेशन सिंदूर पर बहस की मांग कर कोई गलती कर दी?”
यह बयान न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे मोदी सरकार आतंकवाद के मुद्दे को लेकर विपक्ष को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही।
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
‘ऑपरेशन सिंदूर‘ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया एक प्रत्युत्तर अभियान है। इस ऑपरेशन में सेना ने उन आतंकियों को निशाना बनाया जिन्होंने निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया था।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में हाई-लेवल इंटेलिजेंस और विशेष दस्तों की मदद से टारगेटेड एक्शन लिए गए, जिससे घाटी में आतंकियों की कमर तोड़ दी गई।

एनडीए की बैठक का माहौल
प्रधानमंत्री मोदी जैसे ही एनडीए सांसदों के बीच पहुंचे, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, और अन्य सहयोगी दलों के नेता मौजूद थे।
बैठक में पीएम मोदी को एक विशेष स्मृति चिन्ह भेंट किया गया, जिसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सेना की वीरता को दर्शाया गया था। सभी दलों ने एक सुर में इस कार्रवाई की सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी का भाषण: विपक्ष पर हमला, देश के प्रति प्रतिबद्धता
पीएम मोदी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा:
“जब देश की सुरक्षा की बात आती है, तो हमारी सरकार किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करती। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हमने तुरंत कार्रवाई की। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हमारी नीति का परिचायक है स्पष्ट, सटीक और निर्णायक।”
इसके बाद उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा:
“अब मुझे लगता है कि विपक्ष सोच रहा होगा कि क्या उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर संसद में बहस की मांग कर कोई गलती कर दी? उन्हें यह समझना चाहिए कि देश की जनता सब देख रही है।”
विपक्ष की स्थिति: सवालों के घेरे में
जहां एनडीए ने ऑपरेशन को लेकर एकजुट होकर सरकार की तारीफ की, वहीं विपक्ष अब असहज स्थिति में नजर आ रहा है। संसद में विपक्ष ने पहले इस ऑपरेशन को लेकर विस्तृत बहस की मांग की थी, लेकिन मोदी सरकार के जवाबों और ऑपरेशन की सफलता ने विपक्ष की रणनीति को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
कुछ विपक्षी नेताओं ने मीडिया में बयान देते हुए कहा कि बहस का उद्देश्य सरकार को घेरना नहीं था, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। लेकिन अब यह बयान रक्षात्मक दिखाई दे रहे हैं।

सरकार की नीति: जीरो टॉलरेंस फॉर टेरर
पीएम मोदी ने कहा:
“हमारी नीति स्पष्ट है – आतंक के खिलाफ कोई सहानुभूति नहीं। चाहे सीमा पार से हो या देश के भीतर, हर साजिश का करारा जवाब दिया जाएगा।”
इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि मोदी सरकार आने वाले समय में भी ऐसे ऑपरेशन जारी रखेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर किसी तरह का राजनीतिक समझौता नहीं किया जाएगा।
खुफिया एजेंसियों की भूमिका की सराहना
बैठक में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से खुफिया एजेंसियों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब इंटेलिजेंस नेटवर्क कहीं अधिक मजबूत और तेजी से काम करता है। “हमारी एजेंसियां अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देतीं, बल्कि पहले से कार्रवाई करती हैं,” मोदी ने कहा।
राजनीतिक विश्लेषण: यह बयान कितना प्रभावशाली रहा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का यह तंज विपक्ष को “मनोवैज्ञानिक रूप से” नुकसान पहुंचा सकता है। चुनावी वर्ष में इस तरह के सफल सैन्य अभियान और प्रधानमंत्री की सख्त छवि एनडीए के लिए बड़ी बढ़त साबित हो सकते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर ट्रेंड
#OperationSindoor और #ModiOnTerror जैसे हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे। जनता का एक बड़ा वर्ग सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट नजर आया। कई यूजर्स ने लिखा, “अब आतंकियों को पता चल गया है कि भारत बदल चुका है।”
संदेश साफ है, आतंकवाद के खिलाफ सख्ती ही नीति है
एनडीए की बैठक ने एक स्पष्ट संदेश दिया है – देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान न केवल विपक्ष पर तंज था, बल्कि यह एक चेतावनी भी थी कि यदि देश की सुरक्षा के मुद्दे को राजनीति का माध्यम बनाया गया, तो उसका करारा जवाब मिलेगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक नया अध्याय है। प्रधानमंत्री मोदी की कड़ी चेतावनी, विपक्ष पर तंज और सरकार की स्पष्ट नीति ने इस मुद्दे को आगामी चुनावों में भी प्रासंगिक बना दिया है।
देश अब केवल प्रतिक्रिया नहीं, पहले से रणनीति बनाकर कदम उठा रहा है — यही है नया भारत।
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