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स्कूल की किताबों में कथित गलतियों पर बवाल! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और CBI जांच की मांग, सड़क पर उतरे BJD कार्यकर्ता

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Crowd of protesters pushing against police barricades as officers and security personnel manage the scene; a news channel watermark appears in the top-right and a red Hindi headline banner runs across the bottom.
Source: ANI
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The Journalist News (Lucknow): ओडिशा में स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। बीजू युवा जनता दल (BYJD) और बीजू छात्र जनता दल (BCJD) ने इस मुद्दे को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप है कि स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में गंभीर त्रुटियां हैं, जिससे छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। विपक्षी दल ने इस मामले को शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

बीजू युवा जनता दल और बीजू छात्र जनता दल के नेताओं का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियां शिक्षा विभाग की लापरवाही को दर्शाती हैं। उनका आरोप है कि यदि किताबों की तैयारी और प्रकाशन में पर्याप्त जांच की गई होती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा मंत्री को इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

Source: ANI

CBI जांच की उठी मांग

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग भी की। उनका कहना है कि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गलतियां कैसे हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। इसलिए मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

आगे पढ़िए: 2029 चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस! मणिकम टैगोर बोले – ‘तमिलनाडु में राहुल गांधी ही सबसे बड़ा विकल्प’

छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल की पाठ्यपुस्तकें छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री होती हैं। यदि इनमें तथ्यात्मक या अन्य प्रकार की गलतियां हों, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षाओं पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द आवश्यक सुधार करने चाहिए ताकि छात्रों को सही और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान बीजेडी समर्थकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। उनका कहना है कि पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा और संपादन प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की जरूरत है। हालांकि, सरकार की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच नारेबाजी

भुवनेश्वर में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया, हालांकि कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पाठ्यपुस्तक के प्रकाशन से पहले उसकी कई स्तरों पर जांच और सत्यापन आवश्यक होता है। यदि किताबों में किसी प्रकार की त्रुटियां सामने आती हैं तो उन्हें समय रहते सुधारना छात्रों के हित में बेहद जरूरी है।

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