The Journalist News (Lucknow): सफलता की कहानियां अक्सर संघर्ष और दृढ़ संकल्प से लिखी जाती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हैदराबाद के पवन कुमार चंदना की, जिन्होंने स्कूल के दिनों में गणित विषय में केवल 51 अंक प्राप्त किए थे। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही छात्र एक दिन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में क्रांति लाने वाला नाम बन जाएगा। आज पवन कुमार चंदना देश की अग्रणी निजी स्पेस टेक कंपनी Skyroot Aerospace के सह-संस्थापक हैं और भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
IIT खड़गपुर से की उच्च शिक्षा
स्कूल की पढ़ाई के बाद पवन कुमार चंदना ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर प्रतिष्ठित IIT खड़गपुर में प्रवेश प्राप्त किया। यहां से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग के दौरान उनकी रुचि अंतरिक्ष और रॉकेट तकनीक की ओर बढ़ती गई। यही रुचि आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय करने वाली साबित हुई।

ISRO में वैज्ञानिक के रूप में किया काम
साल 2012 में पवन कुमार चंदना ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं। यहां उन्होंने करीब छह वर्षों तक कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया। उनकी भागीदारी विशेष रूप से GSLV Mk-III और SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में रही। इन परियोजनाओं ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया। ISRO में काम करते हुए उन्होंने अंतरिक्ष तकनीक, रॉकेट डिजाइन और लॉन्च सिस्टम के क्षेत्र में गहरा अनुभव प्राप्त किया।
ISRO छोड़कर शुरू किया बड़ा सपना
साल 2018 में पवन कुमार चंदना ने एक बड़ा और साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने ISRO की नौकरी छोड़ दी और अपने सहयोगी नागा भरत डाका के साथ मिलकर Skyroot Aerospace की स्थापना की। उनका उद्देश्य भारत में निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष तकनीक को आगे बढ़ाना और कम लागत वाले आधुनिक रॉकेट विकसित करना था। उस समय यह कदम जोखिम भरा माना गया, लेकिन दोनों उद्यमियों ने अपने विजन पर भरोसा बनाए रखा।
भारत का पहला निजी रॉकेट लॉन्च
18 नवंबर 2022 को Skyroot Aerospace ने इतिहास रच दिया। कंपनी ने भारत का पहला निजी रॉकेट ‘विक्रम-S’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन ‘प्रारंभ’ नाम से जाना गया। लॉन्च के दौरान रॉकेट लगभग 90 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा। इस उपलब्धि ने भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक नए युग की शुरुआत की। इस सफलता के बाद Skyroot Aerospace राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई।
आज भारत की सबसे बड़ी निजी रॉकेट फैक्ट्री
वर्तमान में Skyroot Aerospace भारत की सबसे बड़ी निजी रॉकेट निर्माण फैक्ट्रियों में से एक बन चुकी है। कंपनी में लगभग 1,000 कर्मचारी कार्यरत हैं और यह लगातार नई तकनीकों के विकास में जुटी हुई है। हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कंपनी की नई अत्याधुनिक फैक्ट्री का उद्घाटन किया। यह फैक्ट्री भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को और अधिक गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अब ‘विक्रम-1’ मिशन की तैयारी
Skyroot Aerospace को हाल ही में 51 मिलियन डॉलर की बड़ी डीप-टेक फंडिंग प्राप्त हुई है। इस निवेश के बाद कंपनी अपने अगले ऑर्बिटल लॉन्च मिशन ‘विक्रम-1’ की तैयारियों में जुट गई है। यह मिशन कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है और इसके सफल होने पर भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
पवन कुमार चंदना की कहानी इस बात का प्रमाण है कि स्कूल के अंक किसी व्यक्ति की अंतिम पहचान नहीं होते। गणित में 51 अंक पाने वाला छात्र आज भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाओं का निर्माण कर रहा है। उनका सफर बताता है कि मेहनत, सीखने की इच्छा और बड़े सपने किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं।
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