The Journalist News (Lucknow): ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने मुहर्रम के अवसर पर आयोजित अरबईन शोक समारोह में भाग लिया। यह कार्यक्रम Hazrat Ali ibn Musa al-Reza Mosque में आयोजित किया गया, जहां उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। मुहर्रम इस्लाम, विशेषकर शिया समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इस दौरान दुनिया भर में इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में मजलिस, मातम और धार्मिक सभाओं का आयोजन किया जाता है।
श्रद्धालुओं के बीच पहुंचे राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समारोह के दौरान आम श्रद्धालुओं के बीच बैठे और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने इमाम हुसैन की कुर्बानी को न्याय, सत्य और मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धर्मगुरु, सरकारी अधिकारी और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

इमाम हुसैन की शहादत को किया याद
मुहर्रम का महीना करबला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे Imam Hussain और उनके साथियों ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। शिया परंपरा में उनकी शहादत को सत्य, न्याय और मानव गरिमा की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
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अरबईन का महत्व
अरबईन, इमाम हुसैन की शहादत के 40वें दिन मनाया जाने वाला प्रमुख धार्मिक अवसर है। हालांकि मुहर्रम के दौरान भी विभिन्न स्थानों पर शोक सभाएं और स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें श्रद्धालु इमाम हुसैन की शिक्षाओं को याद करते हैं। ईरान में इस अवधि के दौरान मस्जिदों और इमामबाड़ों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
एकता और शांति का संदेश
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने समाज में एकता, भाईचारे और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का संदेश केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए न्याय और साहस की प्रेरणा है। उन्होंने लोगों से आपसी सद्भाव बनाए रखने और समाज में शांति स्थापित करने का आह्वान किया।
दुनिया भर में मनाया जा रहा मुहर्रम
भारत, ईरान, इराक, पाकिस्तान, लेबनान सहित कई देशों में मुहर्रम के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालु जुलूस, मजलिस और प्रार्थना सभाओं के माध्यम से इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धापूर्वक याद कर रहे हैं।
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