Home धर्म अहमदाबाद में मस्जिद से ऐलान, ‘यह आपका त्योहार नहीं’, पतंग न उड़ाने की अपील पर बवाल
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अहमदाबाद में मस्जिद से ऐलान, ‘यह आपका त्योहार नहीं’, पतंग न उड़ाने की अपील पर बवाल

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Source: freepik
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गुजरात के अहमदाबाद से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर ज़ोरदार बहस छेड़ दी है। इस वीडियो में मस्जिद के लाउडस्पीकर से एक आवाज़ सुनाई देती है, जिसमें मुसलमानों से छतों पर न जाने और पतंग न उड़ाने की अपील की जा रही है। यह वीडियो मकर संक्रांति के अवसर पर मनाए जाने वाले प्रसिद्ध उतरायण (अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव) के दौरान का बताया जा रहा है। वीडियो में कथित रूप से कहा गया है कि यह आपका त्योहार नहीं है” और यह भी चेतावनी दी गई है कि पतंग उड़ाने से इस्लाम का मज़ाक” बन सकता है। इस ऐलान को सुनते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत धार्मिक सलाह बताया, तो कईयों ने इसे सामाजिक एकता के खिलाफ कदम बताया।

कब और कैसे सामने आया वीडियो

बताया जा रहा है कि यह वीडियो 16 और 17 जनवरी के बीच वायरल हुआ, जो उतरायण के सबसे प्रमुख दिन माने जाते हैं। इन्हीं दिनों गुजरात के लगभग हर शहर और कस्बे में लोग सुबह से शाम तक छतों पर पतंग उड़ाते नज़र आते हैं। वीडियो में सुनाई देने वाली आवाज़ के बारे में दावा किया गया है कि यह अहमदाबाद की किसी मस्जिद के लाउडस्पीकर से की गई घोषणा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह ऐलान किस मस्जिद से किया गया और किस व्यक्ति ने इसे दिया।

ऐलान में क्या कहा गया

वीडियो के अनुसार, लाउडस्पीकर से मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए कहा गया कि वे पतंग उड़ाने जैसी गतिविधियों से दूर रहें। संदेश में यह भी कहा गया कि यह त्योहार उनका नहीं है और इसमें भाग लेना उनके धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है। साथ ही, मुसलमानों से यह भी अपील की गई कि वे छतों पर जमा न हों और ऐसे किसी भी कार्य से बचें जिससे उनके धर्म का “मज़ाक” बने।

हर धर्म, हर समुदाय की भागीदारी

गुजरात में उतरायण को किसी एक धर्म तक सीमित नहीं माना जाता। वर्षों से हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी समुदायों के लोग इस त्योहार में हिस्सा लेते आए हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर यह बात भी उठाई कि मुस्लिम समुदाय के अनेक परिवार परंपरागत रूप से उतरायण में पतंग उड़ाते रहे हैं और इसे सिर्फ एक सांस्कृतिक गतिविधि के रूप में देखते हैं, न कि धार्मिक अनुष्ठान के रूप में।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

  • कुछ यूज़र्स ने कहा कि यह एक आंतरिक धार्मिक अपील है और इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
  • वहीं, कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब उतरायण एक साझा सांस्कृतिक पर्व है, तो किसी समुदाय को अलग-थलग करने वाली भाषा क्यों इस्तेमाल की गई।

कुछ यूज़र्स ने यह भी कहा कि इस तरह के संदेश सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं।

धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सामाजिक एकता

यह मामला एक बार फिर धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक एकता के बीच संतुलन की बहस को सामने ले आया है। भारत में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की आज़ादी है। साथ ही, सार्वजनिक जीवन में सामूहिक सौहार्द बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई संदेश सार्वजनिक लाउडस्पीकर से दिया जाता है, तो उसका असर केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है।

प्रशासन की भूमिका

इस मामले पर फिलहाल किसी आधिकारिक प्रशासनिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। न ही यह स्पष्ट किया गया है कि वीडियो की सत्यता की जांच की गई है या नहीं। हालांकि, गुजरात प्रशासन पहले भी उतरायण के दौरान सुरक्षा और शांति बनाए रखने को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी करता रहा है, जिसमें पतंगबाज़ी के दौरान सुरक्षा उपायों पर ज़ोर दिया जाता है।

सौहार्द की मिसालें भी आईं सामने

जहां एक ओर यह वीडियो विवाद का कारण बना, वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने उतरायण के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द की मिसालें भी साझा कीं। कई जगहों पर अलग-अलग समुदायों के लोग एक-दूसरे के साथ पतंग उड़ाते, मिठाइयाँ बांटते और त्योहार का आनंद लेते नज़र आए। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में मुस्लिम परिवारों को भी पूरे उत्साह के साथ उतरायण मनाते देखा गया।

आगे पढ़िए: प्रतीक-अपर्णा तलाक: राज, राजनीति और राजघराने का सच!

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