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तेज बुखार बना बच्चों की ज़िंदगी का दुश्मन! गाजीपुर के 11 गांवों में 70 से ज्यादा दिव्यांग

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गाजीपुर के गांवों में तेज बुखार के बाद दिव्यांग हुए बच्चे, रहस्यमयी बीमारी से फैला डर
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गाज़ीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से सामने आई एक चिंताजनक स्वास्थ्य समस्या ने प्रशासन और डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के 11 गांवों में तेज बुखार के बाद बच्चों के दिव्यांग होने के मामले सामने आए हैं। बीते एक साल में 40 से ज्यादा बच्चे इलाज के लिए आईएमएस बीएचयू पहुंचे हैं, जबकि गांवों में प्रभावित बच्चों की संख्या 70 से अधिक बताई जा रही है। बीएचयू और एम्स की संयुक्त जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आईएमएस बीएचयू और एम्स नई दिल्ली के डॉक्टरों की संयुक्त टीम गांवों में जाकर जांच करेगी। इस टीम में न्यूरोलॉजिस्ट, कम्यूनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ और जीन विज्ञानी शामिल होंगे। बच्चों के जेनेटिक सैंपल, पैथोलॉजी जांच और न्यूरोलॉजिकल टेस्ट किए जाएंगे।

बुखार के बाद झटका और लकवा

डॉक्टरों के अनुसार, प्रभावित बच्चों को पहले तेज बुखार आता है, इसके बाद झटके (सीजर) लगते हैं। इसके बाद शरीर का कोई हिस्सा काम करना बंद कर देता है और बच्चे दिव्यांग हो जाते हैं। कई बच्चे ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे हैं, उनके हाथ-पैर टेढ़े हो गए हैं और शरीर में अकड़न देखी जा रही है।

जन्म के बाद भी सामने आ रही समस्या

चिंता की बात यह है कि कुछ मामलों में यह समस्या जन्म के तुरंत बाद सामने आई, जबकि कुछ बच्चे सामान्य जन्म के बाद कुछ समय बाद दिव्यांग हो गए। डॉक्टरों को आशंका है कि यह मस्तिष्क ज्वर (एन्सेफलाइटिस) के बाद दिमाग में सूजन का मामला हो सकता है।

डॉक्टरों ने जताई गंभीर चिंता

आईएमएस बीएचयू के प्रो. विजयनाथ मिश्रा, प्रो. अभिषेक कुमार पाठक और प्रो. आरएन चौरसिया ने बच्चों का इलाज किया है और इसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताया है।
प्रो. मिश्रा के अनुसार, जांच में यह भी देखा जाएगा कि कहीं पानी में कोई टॉक्सिक तत्व या जेनेटिक कारण तो इसकी वजह नहीं है।

जांच टीम में शामिल विशेषज्ञ

  • प्रो. अभिषेक पाठक – अध्यक्ष, न्यूरोलॉजी विभाग (बीएचयू)
  • प्रो. आरएन चौरसिया – न्यूरोलॉजी (बीएचयू)
  • प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे – जीन विज्ञानी (बीएचयू)
  • प्रो. अचल श्रीवास्तव – न्यूरोलॉजी (एम्स दिल्ली)
  • प्रो. संजय राय – कम्यूनिटी मेडिसिन (एम्स दिल्ली)

जल्द ही गांवों में मेडिकल कैंप लगाकर बच्चों की जांच की जाएगी, जिससे इस रहस्यमयी बीमारी के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

आगे भी पढ़े: थाईलैंड में दर्दनाक हादसा: निर्माणाधीन साइट की क्रेन ने छीनी 22 जिंदगियाँ

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