समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि आगामी चुनाव से पहले कुछ ताकतें हर विधानसभा सीट से लगभग 50 हजार वोटों को वोटर लिस्ट से गायब कराने की कोशिश कर रही हैं। उनके अनुसार यह एक सुनियोजित योजना है, जिसका उद्देश्य विपक्षी वोट आधार को कमजोर करना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करना है।अखिलेश यादव ने कहा कि हाल के महीनों में हजारों मतदाताओं ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनके नाम बिना जानकारी के वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। कुछ जगहों पर पूरा परिवार ही लिस्ट से गायब पाया गया। उन्होंने इसे “लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़” बताते हुए चुनाव आयोग से तुरंत संज्ञान लेने और कड़ी जांच कराने की मांग की है।उन्होंने कहा कि अगर वोटर लिस्ट में इतनी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होती रही, तो आम जनता का भरोसा चुनावी प्रणाली पर से उठ जाएगा। अखिलेश ने आरोप लगाया कि यह सब विपक्ष की आवाज़ दबाने और चुनावी माहौल को एकतरफा बनाने की कोशिश का हिस्सा है।सपा अध्यक्ष ने जनता से अपील की कि वे अपने-अपने मतदान केंद्रों पर जाकर वोटर लिस्ट में अपना नाम अवश्य सत्यापित करें, और अगर नाम गायब मिले तो तुरंत आवेदन कर उसे दोबारा जुड़वाएँ। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भी गांव-गांव और वार्ड-वार्ड जाकर मतदाताओं की मदद करने के निर्देश दिए हैं।राजनीतिक हलकों में अखिलेश यादव के इस बयान ने हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दल भी लगातार चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष इन आरोपों को निराधार बताते हुए कह रहा है कि लिस्ट का अपडेट एक नियमित प्रक्रिया है।अभी तक चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संभावित चुनाव नजदीक होने के चलते इस तरह के आरोपों ने वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।

चुनावी मौसम जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज होती जा रही है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का बयान प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। अखिलेश ने आरोप लगाया है कि हर विधानसभा सीट से करीब 50 हजार वोटों को वोटर लिस्ट से हटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है, और यदि यह सही है तो यह लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है।अखिलेश यादव का कहना है कि हाल के दिनों में हजारों लोगों ने शिकायत की है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से बिना किसी सूचना के काट दिया गया है। कई परिवारों ने तो यह तक दावा किया कि उनके पूरे-के-पूरे परिवार के नाम एक साथ गायब कर दिए गए हैं। अखिलेश ने इसे एक “सिस्टमेटिक वोट रिमूवल अभियान” बताते हुए कहा कि यह किसी आम त्रुटि का हिस्सा नहीं, बल्कि चुनाव को एकतरफा बनाने की कोशिश है।उन्होंने चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब जनता को अपना नाम हटने का पता सोशल मीडिया या स्थानीय लिस्ट चेक करने पर लगे, तो यह गंभीर मामला है और इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।
अखिलेश ने चेतावनी दी कि यदि वोटर लिस्ट से इस पैमाने पर वोट गायब होते रहे, तो चुनावी प्रक्रिया पर से जनता का भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब विपक्षी वोट बैंक को कमजोर करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।अखिलेश यादव ने जनता से अपील करते हुए कहा कि वे अपने-अपने मतदान केंद्रों पर जाकर वोटर लिस्ट में अपना नाम अवश्य चेक करें, और यदि नाम हटा दिया गया है तो तत्काल फॉर्म जमा कर दोबारा जुड़वाएँ। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिया है कि वे बूथ स्तर पर घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करें और गलतियों को सुधारने में उनकी मदद करें।राजनीतिक माहौल में इस बयान को लेकर प्रतिक्रियाएँ तेज हैं। विपक्षी दलों ने अखिलेश के दावे को गंभीर मुद्दा बताते हुए जांच की मांग की है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि यह “बिना सबूत का राजनीतिक शोर” है और वोटर लिस्ट अपडेट एक नियमित प्रक्रिया है।हालाँकि, मतदाताओं की शिकायतें और सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट इस विवाद को और गहरा रहे हैं। कई लोग दावा कर रहे हैं कि उनका नाम, जो पिछले चुनाव तक लिस्ट में था, इस बार गायब है।अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या यह महज संयोग है या बड़े पैमाने पर वोट हटाने की कोई संगठित प्रक्रिया? इस सवाल का जवाब चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
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