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‘पानी रोका तो युद्ध होगा!’ भारत को लेकर पाकिस्तान की नई धमकी से बढ़ा तनाव

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Two flags (India and Pakistan) fly above two soldiers by a rugged river canyon; Hindi headline reads: 'पानी रोकना तो युद्ध होगा!' भारत को लेकर पाकिस्तान की नई धमकी से बढ़ा तनाव; The Journalist watermark visible.
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The Journalist News (Lucknow): भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके हिस्से के पानी को रोकने, मोड़ने या कम करने की कोशिश की गई तो इसे क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा माना जाएगा। पाकिस्तान ने दोहराया कि उसके हिस्से के पानी में किसी भी तरह का हस्तक्षेप उसके लिए “युद्ध की कार्रवाई” (Act of War) माना जाएगा।

इस्लामाबाद में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान दिया बयान

इस्लामाबाद में वर्ष 1960 की सिंधु जल संधि पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि साझा जल संसाधनों को कभी भी “हथियार” के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत द्वारा संधि को स्थगित रखने का फैसला “अवैध” है। डार ने कहा कि पाकिस्तान संधि के तहत अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करेगा।

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‘सिंधु हमारी जीवनरेखा है’

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी भारत को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि पाकिस्तान की “जीवनरेखा” है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों का सिंधु नदी के जल पर “अटूट अधिकार” है। तरार ने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की गई तो उसका “निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।

आगे पढ़िए: प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची की मुलाकात, भारत-जापान रिश्तों को मिली नई रफ्तार

जलवायु परिवर्तन मंत्री का विवादित बयान

पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जो भी हमारे पानी को छुएगा, हम उसके हाथ काट देंगे।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपने जल भंडारण की क्षमता बढ़ाने के लिए नए बांधों के निर्माण पर राष्ट्रीय सहमति बनानी चाहिए।

क्या है सिंधु जल संधि?

सिंधु जल संधि पर 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते में विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। संधि के तहत

  • भारत को रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों का नियंत्रण मिला।
  • पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का उपयोग करने का अधिकार मिला।
  • भारत को पश्चिमी नदियों पर सीमित और निर्धारित उद्देश्यों के लिए जल उपयोग की अनुमति है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का फैसला

भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इस आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। नई दिल्ली का स्पष्ट कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक संधि पर रोक जारी रहेगी।

पहले भी सामने आ चुके हैं विवादित बयान

पाकिस्तान की ओर से पिछले एक वर्ष के दौरान कई बार आक्रामक बयान सामने आए हैं। वर्ष 2025 में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हवाले से यह बयान भी सामने आया था कि पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति है और यदि उसके अस्तित्व को खतरा हुआ तो वह “आधी दुनिया को साथ ले डूबेगा।” भारत ने उस समय ऐसे बयानों को गैर-जिम्मेदाराना और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नुकसानदायक बताया था।

बढ़ सकता है कूटनीतिक तनाव

ताजा बयानों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल भारत ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है और आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी नीति पर कायम है। वहीं पाकिस्तान लगातार सिंधु जल संधि को बहाल करने की मांग कर रहा है।

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