The Journalist news (Lucknow): उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में संभावित प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी तरुण गौबा, जो वर्तमान में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) सुरक्षा के पद पर तैनात हैं, उन्हें लखनऊ का नया पुलिस कमिश्नर बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। पुलिस विभाग में यह चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी सुजीत पांडे के नेशनल पुलिस अकादमी (NPA) के लिए रिलीव होने और वर्तमान लखनऊ पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र सिंह सेंगर के पुलिस महानिदेशक (DGP) पद पर पदोन्नति की संभावनाओं को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
प्रशासनिक फेरबदल की अटकलें
सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार जल्द ही वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादलों और नई नियुक्तियों से जुड़ा आदेश जारी कर सकती है। इसी संभावित फेरबदल के तहत तरुण गौबा का नाम लखनऊ पुलिस कमिश्नर के लिए प्रमुख दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, पुलिस मुख्यालय या गृह विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कौन हैं तरुण गौबा?
तरुण गौबा 2001 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश पुलिस में ADG सुरक्षा के रूप में कार्यरत हैं। वे विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और कानून-व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन तथा प्रशासनिक कार्यों का व्यापक अनुभव रखते हैं। यदि उन्हें लखनऊ पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया जाता है, तो राजधानी की कानून-व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और अपराध नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उनके कंधों पर होंगी।
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लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का महत्व
उत्तर प्रदेश की राजधानी होने के कारण लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट राज्य की सबसे महत्वपूर्ण पुलिस इकाइयों में से एक है। यहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ, विधानसभा, सचिवालय और कई संवेदनशील सरकारी संस्थान स्थित हैं। ऐसे में पुलिस कमिश्नर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
आधिकारिक आदेश का इंतजार
फिलहाल, तरुण गौबा की नियुक्ति को लेकर केवल चर्चाएं और अटकलें सामने आई हैं। सरकार की ओर से कोई अधिसूचना या आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए इस जानकारी को अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि यदि प्रस्तावित फेरबदल को मंजूरी मिलती है, तो जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किए जा सकते हैं। तब तक सभी संभावनाएं केवल अटकलों के दायरे में हैं।
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